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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 21
तत्रादौ परमेशानि प्रपञ्चन्यास उच्यते । प्रपञ्चद्वीपजलधिगिरिपत्तनपीठकाः ॥
हे परमेशानि! पहले 'प्रपञ्चन्यास' बताता हूँ जो प्रपञ्च, द्वीप, जलधि, खेत,
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