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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 19
अल्पषोढां कुलेशानि कुर्यात् पूर्वोक्तवर्त्मना । महाषोढाह्वयं न्यासं ततः कुर्यात् समाहितः । वक्ष्यमाणेन विधिना देवताभावसिद्धये ॥
हे कुलेशानि! साधक को पूर्वोक्त क्रम से इस प्रकार अल्पषोढान्यास करना चाहिए। इसके बाद सावधान होकर देवताभाव की सिद्धि के लिए वक्ष्यमाण विधि से 'महाषोढा' नामक न्यास करे।
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