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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 18
पञ्चसु ब्रह्मणि तथैवाङ्गविन्यासमाचरेत् । आधारशक्तिमारभ्य पीठमन्त्रान्तमम्बिके ॥
ये न्यास आधारशक्ति से आरम्भ करके पीठमन्त्र पर्यन्त करना चाहिए।
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