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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 17
ईशतत्पुरुषाघोरसद्योजातात्मनस्तथा । पञ्चा‌ङ्गुलिषु विन्यस्य मूर्ति वक्त्रेषु विन्यसेत् ॥
अल्पषोढान्यास - हे अम्बिके! पाँचों अंगुलियों से ईशान, तत्पुरुष, अघोर, सद्योजात और आत्मा रूप मूर्ति का मुखों में न्यास करें। इसी प्रकार मूर्धा, हृदय, गुह्य और पाददेश में क्रमशः अङ्गुष्ठ सहित पाँचों अंगुलियों से अङ्गन्यास करे।
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