दीर्घ त्रय से युक्त बीज, शक्ति एवं कीलक है और षड्दीर्घ युक्त मूलबीज से षडङ्गन्यास कहा गया है। (हसां स्हां बीज है, हसी रहीं शक्ति है और हसूं स्हूं कीलक है)।
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