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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 15
ऋषिरस्य परः शम्भुश्छन्दश्चाव्यक्तपूर्विका । गायत्री देवता चात्र सर्वमन्त्रेश्वरी परा ॥
श्री पराप्रासादमन्त्र का ऋष्यादिन्यास - हे पार्वति! इस मन्त्र के ऋषि परशम्भु हैं, अव्यक्तागायत्री छन्द है, सर्वमन्त्रेश्वरी परादेवता,
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