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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 13
पादुकास्मरणञ्चैव दिननाथार्चनं प्रिये । कराङ्गशोधनं प्राणायामः स्वब्रह्मरन्ध्रके ॥
तदनन्तर गुरुपादुकामन्त्र का स्मरण कर हे प्रिये! दिवस के नाथ (सूर्य) का अर्चन करे। फिर कराङ्ग और षडङ्गों का शोधन एवं ब्रह्मरन्ध्र में प्राणायाम,
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