तदनन्तर गुरुपादुकामन्त्र का स्मरण कर हे प्रिये! दिवस के नाथ (सूर्य) का अर्चन करे। फिर कराङ्ग और षडङ्गों का शोधन एवं ब्रह्मरन्ध्र में प्राणायाम,
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