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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 11
एकान्ते द्वारयजनं विघ्नत्रयनिवारणम् । पूजास्थानप्रवेशश्च तथासनोपवेशनम् ॥
एकान्त में द्वारपूजा, तीनों विघ्नों का उत्सारण (निवारण) कर पूजास्थान में प्रवेश कर आसन पर बैठे।
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