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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 10
कन्दमूले मनः कृत्वा कुर्याद्विण्मूत्रमोचनम् । शौचास्यशोधनं स्नानं सन्ध्यातर्पणमाचरेत् ॥
फिर एक बार मूलमन्त्र (कुलमन्त्र) का स्मरण कर शौचादि से निवृत्त हो। तब मुख शोधन, स्नान, सन्ध्या, तर्पण करे।
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