श्री देवी ने कहा - हे कूुठेश! मैं श्री प्रासादपरामन्त्र को सुनना चाहती हूं। हे ईशान! उस मन्त्ररत्न मन्त्रराज को न्यास एवं ध्यान आदि के सहित बताइये।
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