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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 9
यावन्तः पांसवो भूमेस्तावन्तः समुदीरिताः । एकैकाम्नायजा मन्त्रा भुक्तिमुक्तिफलप्रदाः ॥ उपमन्त्राश्च तावन्तः सारदाः समुदीरिताः । मयैव कथितास्ते तु लोकानुग्रहकाङ्क्षया ॥
प्रत्येक आम्नाय के असंख्य मन्त्र कहे गए है, जो भुक्ति और मुक्ति के देने वाले हैं तथा पृथ्वी पर जितने धूल के कण है इसी प्रकार प्रत्येक आम्नाय के असंख्य उपमन्त्र भी कहे गए हैं। संसार के कल्याण की इच्छा से मैंने, ही उन सब को कहा है।
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