प्रत्येक आम्नाय के असंख्य मन्त्र कहे गए है, जो भुक्ति और मुक्ति के देने वाले हैं तथा पृथ्वी पर जितने धूल के कण है इसी प्रकार प्रत्येक आम्नाय के असंख्य उपमन्त्र भी कहे गए हैं। संसार के कल्याण की इच्छा से मैंने, ही उन सब को कहा है।
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