इस प्रकार हे देवि! ऊर्ध्वाम्नाय और श्रीप्रासादपरामन्त्र का माहात्म्य मैंने आपको बताया। अब आप क्या सुनना चाहती है?
इस प्रकार कुलार्णवतन्त्र के ऊर्ध्वाम्नायतन्त्र में श्रीप्रासादपरामन्त्रकथन नामक तृतीय उल्लास की पं० चित्तरञ्जन मालवीय कृत हिन्दी व्याख्या पूर्ण हुई।
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