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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 75
जपेत् पञ्चशतं यस्तु श्रीप्रासादपरामनुम् । तत्फलं नैव शक्नोमि कथितुं कुलनायिके ॥
हे कुलनायिके! जो श्रीप्रासादपरामन्त्र का पाँच सौ बार जप करता है, उसके फल का वर्णन करने में मैं समर्थ नहीं हूँ।
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