हे देवी! श्रीप्रासादपरामन्त्र को दो सौ बार जो जप करता है, वह पिछले चौरासी लाख योनियों के अपने विविध एवं असंख्य जीवनों की बाल्य, यौवन, वृद्धावस्था में, जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति दशाओं में मन, वचन, कर्म से ज्ञान या अज्ञानपूर्वक किये गये समस्त महापापों एवं करोड़ों उपपाप समूहों से छूटकारा पा जाता है, इसमें सन्देह नहीं है, हे वरानने! यह सत्य है।
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