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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 71
आगमोक्तेन विधिना क्रमपूजापुरःसरम् । श्रीप्रसादपरामन्त्रं शतमष्टोत्तरं जपेत् । मुच्यते ब्रह्महत्यादिमहापापैश्च पञ्चभिः ॥
श्रीप्रासादपरामन्त्र की जप विधि यह है कि आगमोक्त विधि से क्रमपूजा सहित श्रीप्रासादपरा मन्त्र का एक सौ आठ बार जप करे। इससे ब्रह्महत्या आदि पाँच महापापों से मुक्त हो जाता है।
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