यही परम ज्ञान है, यही परम तप है, यही परम ध्यान है, यही परम अर्चन है, यही परा दीक्षा है और यही परम जप है। यही परम तत्त्व है, यही परम व्रत है, यही परम यज्ञ है, यही परम श्रेय है, यही परम फल है, यही परम ब्रह्म है और यही परा गति है। यही परमं गुह्य है, यह सत्य है, इसमें सन्देह नहीं। इस श्रेष्ठ मन्त्र को ऐसा मान कर उसमें सदा निष्ठा रखे।
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