मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 70
इदमेव परं ज्ञानमिदमेव परं तपः । इदमेव परं ध्यानमिदमेव परार्चनम् ॥ इदमेव परा दीक्षा इदमेव परो जपः । इदमेव परं तत्त्वमिदमेव परं व्रतम् ॥ इदमेव परो यज्ञ इदमेव परात् परम् । इदमेव परं श्रेय इदमेव परं फलम् ॥ इदमेव परं ब्रह्म इदमेव परा गतिः । इदमेव परं गुह्यं सत्यं सत्यं न संशयः । इति मत्वा मनुवरं तन्निष्ठः स्यात् सदा प्रिये ॥
यही परम ज्ञान है, यही परम तप है, यही परम ध्यान है, यही परम अर्चन है, यही परा दीक्षा है और यही परम जप है। यही परम तत्त्व है, यही परम व्रत है, यही परम यज्ञ है, यही परम श्रेय है, यही परम फल है, यही परम ब्रह्म है और यही परा गति है। यही परमं गुह्य है, यह सत्य है, इसमें सन्देह नहीं। इस श्रेष्ठ मन्त्र को ऐसा मान कर उसमें सदा निष्ठा रखे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें