आम्नाया बहवो गुप्तश्चतुराम्नायभेदजाः ।
अस्मिंस्तन्त्रे समाख्याताः पूर्वं ते कुलनायिके ॥
हे कुलनायिके! चारों आम्नायों से बहुत से गुप्त आम्नायों की उत्पत्ति हुई है। इस तन्त्र में मैं प्रथमतः आपके समक्ष प्रतिपादित करता हूँ।
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