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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 67
शिवशक्तिमयत्वाच्च भुक्तिमुक्तिप्रदानतः । सकर्मापि च निष्कर्म सगुणञ्चापि निर्गुणम् ॥
शिवशक्ति से यह ओतप्रोत है; भुक्ति और मुक्ति का यह देने वाला है; सकर्मा होते हुये भी यह निष्कर्म है; सगुण होते हुये भी निर्गुण है।
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