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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 63
पराप्रासादमन्त्रोऽयं सर्वमन्त्रोत्तमोत्तमः । ज्ञानतोऽज्ञानतो वापि भजतां कामदो मनुः ॥
यह पराप्रासादमन्त्र सब मन्त्रों में श्रेष्ठ है। चाहे ज्ञानपूर्वक इसका भजन करे या अज्ञानपूर्वक, यह मन्त्र सदैव अभीष्ट प्रदान करता है।
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