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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 59
शैव वैष्णवदौर्गार्कगाणपत्येन्दुसम्भवान् । सर्वमन्त्रान् स जानाति पराप्रासादमन्त्रवित् ॥ श्रीप्रासादपरामन्त्रो जिह्वाग्रे यस्य वत्र्त्तते । तस्य दर्शनमात्रेण श्वपचोऽपि विमुच्यते ॥
पराप्रासाद मन्त्र का ज्ञाता शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर, गाणपत्य और चन्द्र सम्प्रदाय के सभी मन्त्रों को जानता है। श्री प्रासादपरामन्त्र जिसके जिह्वाय में रहता है, उसके दर्शनमात्र से चाण्डाल भी मुक्त हो जाता है।
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