दीक्षापूर्वं महेशानि पारम्पर्यसमन्वितम् ।
पराप्रासादमन्त्रं यो वेत्ति सोऽहं न संशयः ॥
हे महेशानि! दीक्षापूर्वक परम्परा क्रमयुक्त जो पराप्रासादमन्त्र को जानता है, वह निःसन्देह मुझे ही प्राप्त कर लेता है।
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