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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 54
पराप्रासादमन्त्रज्ञो यत् करोति यदिच्छति । यद्ब्रूते तन्महेशानि तपो ध्यानं जपो भवेत् ॥
पराप्रासादमन्त्र को जानने वाला जो चाहता है और जो बोलता है, वह सब हे महेशानि! तप, ध्यान और जपस्वरूप ही होता है।
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