पराप्रासादमन्त्रज्ञः श्वपचोऽपि हि पार्वति ।
देवतास्थापने शक्तः प्रतिमादौ न संशयः ॥
हे पार्वति! पराप्रासादमन्त्र का ज्ञाता चाण्डाल भी मूर्ति आदि में देवता की स्थापना करने का अधिकारी होता है, इसमें सन्देह नहीं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।