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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 50
यथा दिव्यमणि स्पर्शाल्लौहो भवति काञ्चनम् । पराप्रासादजापाच्च पशुः पशुपतिर्भवेत् ॥
जिस प्रकार दिव्यमणि के स्पर्श से लौह स्वर्ण बन जाता है, उसी प्रकार पराप्रासाद के जप से पशु साधक भी पशुपति हो जाता है।
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