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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 48
सामर्थ्यं पूज्यता विद्या तेजः सौख्यमरोगिता । राज्यं स्वर्गश्च मोक्षञ्च पराप्रासादजापिनः ॥ ब्रह्मेन्द्ररुद्रविष्णूनामपि दूरायते पदम् । सर्वकर्मविहीनोऽपि पराप्रासादमन्त्रवित् । सुखेन यां गतिं याति न तां सर्वेऽपि धार्मिकाः ॥
पराप्रासादमन्त्र का जप करने वाले सामर्थ्य, पूजा, ज्ञान, तेज, सुख, आरोग्यता, राज्य, स्वर्ग एवं मोक्ष प्राप्त करते है, और वे ब्रह्मा, इन्द्र, रुद्र तथा विष्णु के पद से भी आगे बढ़ जाते हैं। पराप्रासादमन्त्र का ज्ञाता सर्वकर्मविहीन होते हुये भी सहज ही जिस गति को प्राप्त करता है, उसे कोई भी धार्मिक व्यक्ति प्राप्त नहीं कर पाता।
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