हे प्रिये! ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र सहित इन्द्रादि श्रेष्ठ देवता, वसु, रुद्र एवं द्वादश आदित्य, दिक्पाल, मनु, चन्द्रादि और मार्कण्डेय आदि मुनि और वसिष्ठ आदि मुनीश्वर, सनकादि योगीश, जीवन्मुक्त शुकादि तथा यक्ष, किन्त्रर, गन्धर्व, सिद्ध, विद्याधर आदि सभी इस अमित फलदायक, प्रभावशाली तथा पुण्यवान् श्रीप्रासादपरामन्त्र को पाकर, हे पार्वति! आज भी जपते रहते हैं।
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