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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 47
सब्रह्माविष्णुरुद्राश्च शक्रादिसुरपुङ्गवाः । वसुरुद्रार्कदिक्पाला मनुचन्द्रादयः प्रिये ॥ मार्कण्डेयादिमुनयो वसिष्ठादिमुनीश्वराः । सनकाद्याश्च योगीशा जीवन्मुक्ताः शुकादयः ॥ यक्षकिन्नरगन्धर्वाः सिद्धविद्याधरादयः । श्रीप्रासादपरामन्त्रप्रभवञ्चामितं फलम् । प्राप्य मन्त्रमिमं पुण्यं जपन्त्यद्यापि पार्वति ॥
हे प्रिये! ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र सहित इन्द्रादि श्रेष्ठ देवता, वसु, रुद्र एवं द्वादश आदित्य, दिक्पाल, मनु, चन्द्रादि और मार्कण्डेय आदि मुनि और वसिष्ठ आदि मुनीश्वर, सनकादि योगीश, जीवन्मुक्त शुकादि तथा यक्ष, किन्त्रर, गन्धर्व, सिद्ध, विद्याधर आदि सभी इस अमित फलदायक, प्रभावशाली तथा पुण्यवान् श्रीप्रासादपरामन्त्र को पाकर, हे पार्वति! आज भी जपते रहते हैं।
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