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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 43
विचार्याहं पुराणार्थान् दर्शनाम्नायभेदजान् । ग्रसमान् वेद्म्यहं मन्त्रान् शास्त्राणि विविधानि च ॥
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