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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 40
वटबीजे यथा वृक्षः सूक्ष्मरूपेण तिष्ठति । पराप्रासादमन्त्रेऽस्मिन् ब्रह्माण्डोऽपि तथा स्थितः ॥
जिस प्रकार बटबीज में सूक्ष्म रूप से वृक्ष निहित है। इस पराप्रासादमन्त्र में ब्रह्माण्ड भी उसी प्रकार स्थित है।
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