हे अम्बिके! ऊर्ध्वाम्नाय का यह तत्त्व तो रहस्यों में भी अति रहस्यपूर्ण है क्योंकि यह पूर्णब्रह्मात्मक परम तत्त्व है। इसे मैने यत्नपूर्वक गुप्त रखा है किन्तु अब प्रकाशित कर रहा हूँ।
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