मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 4
रहस्यातिरहस्यानां रहस्यमिदमम्बिके ॥ ऊर्ध्वाम्नायस्य तत्त्वं हि पूर्णब्रह्मात्मकं परम् । सुगोपितं मया यत्नादिदानीन्तु प्रकाश्यते ॥
हे अम्बिके! ऊर्ध्वाम्नाय का यह तत्त्व तो रहस्यों में भी अति रहस्यपूर्ण है क्योंकि यह पूर्णब्रह्मात्मक परम तत्त्व है। इसे मैने यत्नपूर्वक गुप्त रखा है किन्तु अब प्रकाशित कर रहा हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें