श्रीप्रासादपरामन्त्रमूर्ध्वाम्नायमधिष्ठितम् ।
आवयोः परमाकारं यो वेत्ति स स्वयं शिवः ॥
ऊर्ध्वाम्नाय में 'श्रीप्रासादपरा' मन्त्र अधिष्ठित है, जो हम दोनों का परम स्वरूप है। अतः उसे जो जानता है, वह स्वयं शिव हो जाता है।
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