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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 32
पूर्वाम्नायस्य सङ्केताश्चतुर्विंशतिरीरिताः । दक्षिणाम्नायसङ्केताः पञ्चविंशतिरीरिताः ॥ पश्चिमाम्नायसङ्केताः द्वात्रिंशत् समुदाहृताः । विदुः षट्त्रिंशदाम्नाये सङ्केताः श्रीमदुत्तरे ॥
पूर्वाम्नाय के चौबीस सङ्केत कहे गये हैं। दक्षिणाम्नाय के सङ्केत पचीस कहे हैं। पश्चिमाम्नाय के सङ्केत बत्तीस हैं और श्रीमद् उत्तराम्नाय में छत्तीस सङ्केत कहे गये हैं।
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