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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 28
स यत्र वसते देवि तत्र श्रीर्विजयो भवेत् । अनामयं सुभिक्षञ्च सुवृष्टिर्निरुपद्रवम् ॥
हे देवि! जहाँ वह साधक निवास करता है, वहाँ लक्ष्मी और विजय होती है। उस स्थान में नीरोगता, अन्नादि की बहुलता, सुन्दर वर्षा और सदा शान्ति रहती है।
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