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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 22
तमेवान्वेषयेत्तत्र सर्वज्ञ करुणानिधिम् । सर्वलक्षणसम्पन्नं ऊर्ध्वाम्नायार्थकोविदम् । तस्माद्देवेशि जानीयादूर्ध्वाम्नायं कुलेश्वरि ॥
अतः ऊर्ध्वाम्नाय के अर्थ को जानने वाले उन्हीं दयालु, सर्वज्ञ एवं सर्वगुणसम्पन्न गुरुदेव की खोज करनी चाहिये और हे देवेशि! हे कुलेश्वरि! उनसे ऊर्ध्वाम्नाय को जानना चाहिये।
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