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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 21
न वेदैर्नागमैः शास्त्रैर्न पुराणैः सुविस्तरैः । न यज्ञैर्न तपोभिर्वा न तीर्थव्रतकोटिभिः ॥ नान्यैरुपायैर्देवेशि मन्त्रौषधिपुरः सरैः । आम्नायो ज्ञायते चोर्ध्वः श्रीमद्‌गुरुमुखं विना ॥
श्रीमद् गुरुदेव के मुख के बिना ऊर्ध्वाम्नाय का ज्ञान नहीं हो सकता। न तो वेदों, आगमों, शास्त्रों, पुराणों के विस्तृत अध्ययन से, न करोडों यज्ञों, तपों, तीर्थों, व्रतों से और हे देवेशि! न मन्त्रौषधि आदि अन्य उपायों से ऊर्ध्वाम्नाय का ज्ञान मिलता है।
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