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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 20
धन्यो मनुष्यलक्षेषु जानाति कुलदर्शनम् । तेषां लक्षेषु यः कश्चिदूर्ध्वाम्नायं प्रवेत्ति च ॥
लाखों मनुष्यों में वह व्यक्ति धन्य है, जो कुलदर्शन अर्थात् शाक्तदर्शन को जानता है। उन लाखों में कोई ही ऊर्ध्वाम्नाय को जानता है।
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