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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 2
श्रीईश्वर उवाच शृणु देवि प्रवक्ष्यामि यन्मां त्वं परिपृच्छसि । तस्य श्रवणमात्रेण देवता सुप्रसीदति ॥
ईश्वर ने कहा - हे देवि! सुनिए, जो आपने पूछा है, उसे मैं बताऊँगा। उसके सुनने मात्र से देवता अत्यन्त प्रसन्न होते हैं।
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