देवों में जैसे विष्णु, ज्योतियों (नक्षत्रों) में जैसे सूर्य, तीर्थों में जैसे काशी, नदियों में जैसे गङ्गा, पर्वतों में जैसे मेरु, वृक्षों में जैसे चन्दन, यज्ञों में जैसे अश्वमेध, पत्थरों में जैसे मणि, रसों में जैसे मधुरता, धातुओं में जैसे स्वर्ण, पशुओं में जैसे गाय, पक्षियों में जैसे हंस, आश्रमों में जैसे भिक्षु, वर्षों में जैसे ब्राह्मण, मनुष्यों में जैसे राजा, अङ्गों में जैसे शिर, सुगन्धियों में जैसे कस्तूरी और पुरियों में जैसे काशी श्रेष्ठ है, वैसे ही हे प्रिये! सब धर्मों में ऊर्ध्वाम्नाय की श्रेष्ठता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।