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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 17
सर्वलोकेषु सर्वेभ्यो ह्यहं पूज्यो यथा प्रिये । अम्नायेषु च सर्वेषु ऊर्ध्वाम्नायस्तथा शिवे ॥
हे प्रिये! जिस प्रकार सारे लोकों में सबसे अधिक पूज्य मैं हूँ, उसी प्रकार हे शिवे! सभी आम्नायों में ऊर्ध्वाम्नाय श्रेष्ठ है।
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