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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 16
तस्माद्देवेशि जानीहि साक्षान्मोक्षैकसाधनम् । सर्वाम्नायाधिकफलमूर्ध्वाम्नायं परात् परम् ॥
हे देवेशि! ऊर्ध्वाम्नाय को मोक्ष का एकमात्र साधन जानना चाहिए। यह सब आम्नायों से अधिक फल देने वाला और श्रेष्ठ में भी श्रेष्ठतम है।
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