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कुलार्णव • अध्याय 3 • श्लोक 14
ऊर्ध्वत्वात् सर्वधर्माणामूर्ध्वाम्नायः प्रशस्यते । ऊर्ध्वं नयत्यधः स्थञ्च ऊर्ध्वाम्नाय इतीरितः ॥
सब धर्मों से ऊर्ध्व होने के कारण ऊर्ध्वाम्नाय श्रेष्ठ है। निम्न स्थित व्यक्ति को ऊर्ध्वगामी करने से यह 'ऊर्ध्वाम्नाय' कहलाता है।
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