एकाम्नायञ्च यो वेत्ति स मुक्तो नात्र संशयः ।
किं पुनश्चतुराम्नायवेत्ता साक्षाच्छिवो भवेत् ॥
केवल एक आम्नाय को जो जान लेता है, वह मुक्त हो जाता है। इसमें सन्देह नहीं। फिर चार आम्नायों के ज्ञाता की क्या बात है, वह तो साक्षात् शिव ही हो जाता है।
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