दुराचारपराः केचिद्वाचयन्ति च पामराः।
कथंभूतो भवेत् स्वामी सेवकाः स्युस्तथाविधाः ॥
पापी लोग दुराचारी होकर कहा करते हैं कि स्वामी और कितने ही सेवक का सम्बन्ध कैसे सम्भव है।
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