पशुव्रतादिनिरताः सुलभा दाम्भिका भुवि ।
ये कौलमेव सेवन्ते ते महान्तोऽति दुर्लभाः ॥
पशुव्रतों आदि में लगे हुये दम्भी लोग पृथ्वी पर सरलता से मिल जाते हैं किन्तु जो कौल धर्म (शक्ति उपासक) की ही सेवा करते हैं, वे महापुरुष बड़ी कठिनाई से मिलते हैं।
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