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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 9
मथित्वा ज्ञानदण्डेन वेदागममहार्णवम् । सारज्ञेन मया देवि कुलधर्मः समुद्धृतः ॥
वेद और आगमरूपी महासमुद्र को ज्ञानरूपी मथानी से मथकर हे देवि! मैंने इस कुलधर्म को प्रकट किया है।
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