मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 89
वेदशास्त्रागमैः प्रोक्तं भोगमोक्षैकसाधनम् । मूढा निन्दन्ति हा हन्त मत्प्रियं तव दर्शनम् ॥
वेद, शास्त्र एवं आगमों में भोग और मोक्ष का एक ही साधन आपका दर्शन बताया गया है क्योंकी वह मेरा प्रिय है। किन्तु मूढ़ लोग उसकी निन्दा करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें