यथान्धो नैव पश्यन्ति सूर्य सर्वप्रकाशकम् ।
तथा कुलं न जानन्ति तव मयाविमोहिताः ॥
सबको प्रकाशित करने वाले सूर्य को जैसे अन्धे नहीं देख पाते, उसी प्रकार आपकी माया से मोहित मनुष्य कुल को नहीं जान पाते।
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