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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 84
कुलधर्ममिमं ज्ञात्वा मुच्यन्ते सर्वमानवाः । इति मत्वा महेशानि मया कौलं विगर्हितम् ॥
हे महेशानि! इस कुलधर्म को जानकर सभी मनुष्य मुक्त हो जाते हैं। यह देखकर मैंने कौल धर्म की निन्दा की है। (संसार की रक्षा हेतु कुलधर्म की निन्दा)
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