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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 82
दर्शनष्वखिलेष्वेव फलदं चैकदैवतम् । भुक्तिमुक्तिप्रदं नृणां कुलेऽस्मिन् दैवतं प्रिये ॥
सभी दर्शनों में एक देवता ही फलदायक है। हे प्रिये! इस कुल में मनुष्य को भुक्ति एवं मुक्ति देने वाला दैवत है।
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