मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 78
अभिज्ञा एव जानन्ति नाभिज्ञाः कुलदर्शनम् । जलमिश्रपयः पानं बकः किं वेत्ति हंसवत् ॥
ज्ञानी लोग ही कुल दर्शन को जानते हैं, अज्ञानी जन नहीं जानते। जैसे जल में मिले हुए दूध को क्या हंस के समान बगुला पक्षी भी जानता है? नही।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें