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कुलार्णव • अध्याय 2 • श्लोक 77
मानयन्ते हि सारज्ञाः कुलधर्म न चेतरे । शिवः शिरसि धत्तेऽब्जं सैहिकेया गिलत्यहो ॥
भगवान् शिव जिस चन्द्रमा को मस्तक पर धारण करते हैं, उसको राहु निगल जाता है। इसी प्रकार सारतत्त्व को जानने वाले ही कुलधर्म को सम्मान देते हैं, अन्य नहीं।
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